बुधवार, 19 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 69 -----

राजू : -- मास्टर जी ! जदि भारत मा उ 'अंग्रेज टाइप' फिर से कोई आ जावें
              तो का होगा..??

" राजू ! होगा का उ 'अंग्रेज टाइप' भारत के संबिधान को दुई टुक करेंगे
             और जन साधारण के हाथ मा धरा कर कहेंगे इ लो तुम्हारा 'संबिधान'..,

राजू : -- मास्टर जी । फिर का होगा..??,


" राजू ! फिर का होना है उ नेता-मंत्री लोगन को और उ बढ़ महान उद्योगपति
            लोगन को बिसेस राकेट मा बाँध-जोर के छोड़ आवेंगे
            'मून के रंगून मा' और कहेंगे देखो चंदरमा मा मानव जाति के प्रभाव..,

राजू : -- मास्टर जी ! फिर का होगा..??,

" राजू ! फिर का होना है पूछेंगे........उ हवा से.......तुमको वहां से का दिखाई देत है
  तो उ कहेंगे हम से का पूछत हो....... इ हमार पूँछ से पूछो.....पूंछ उलट हवा से ही कहेंगे
  अब काहे अंधवा हो गए.....काहे नाहीं कहते की तुमको तुम्हारे भाई के ताजमहल दिखाई
  देत है और भाई को हवा का महल..,

राजू :-- मास्टर जी ! और उ हाथी -चूहा का, का होगा..??

"वही......जो बहादुर साह जफ़र का हुवा था...... लिखते फिरेंगे

              चंद अल्फाजों की मूहर है जर्रे महताब पर 
               जहाँ से जमीं देखूं मुझको जन्नत लगे है 



 

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