शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 68 -----

"राजू ! का कर रहे हो..,"

राजू :-- मास्टर जी ! रामलीला के मंचन का 'जुगाड़'

" काहे कर रहे हो..,"

राजू :-- मास्टर जी ! काहे की उ बिना लाख पचास हजार लोगन की भीड़
             देखे न तो कछु बोल बतियाते  हैं ना ही कछु बताते हैं.....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...