रविवार, 4 नवंबर 2012

----- मास्टर राजू 57 -----

"राजू ! क्या पढ़ रहे हो..??"

राजू : -- मास्टर जी एक 'धार्मिक' पुस्तक पढ़ रहा हूँ !

" क्या नाम हैं पुस्तक का..??"

राजू : -- पा.....पा.....(ई).....की पप्पियाँ.....मास्टर जी ! आप भी पढेंगे..??

" मैनें तो इसे कल ही पढ़ लिया था..,

राजू : -- मास्टर जी ! तनिक ये तो बताइये इनके 'प्रभु' सैय्या  में सोते ही रहेंगें  की
              उठेगें  भी..??

" राजू ! ये सबके बैंड बजवा के ही उठते हैं.....


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