राजू : -- बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी । कहत साधु महिमा सकुचानी ।।
सो मो सन कहि जात न कैसे । साक बनिक मनि गुण गन जैसे ।।रा. च. मा. /बा. का. /दो. न. 2चौ. न.6
मास्टर जी ! उक्त चौपाई का ससंदर्भ प्रसंगपूर्ण अर्थांकन कीजिए न..,
" ये चौपाई लिखी किसने है..??"
राजू : -- मास्टर जी ! गोस्वामी तुलसी दास ने..,
" तो उन्ही से पूछो वो ही तुम्हें अच्छे से बताएंगे, तुम मुझे ये बताओ
कल तुम पुन: माल में क्या कर रहे थे.."
राजू : -- मास्टर जी ! 'जगत भौजाई' को ढूंड रहा था..,
" मिली..??'
राजू : -- मिली तो किन्तु उतनी आकर्षक नहीं लग रही थी
मास्टर जी ! ये कौन से क्षेत्र से आती हैं..??
" कुरुक्षेत्र से....."
सो मो सन कहि जात न कैसे । साक बनिक मनि गुण गन जैसे ।।रा. च. मा. /बा. का. /दो. न. 2चौ. न.6
मास्टर जी ! उक्त चौपाई का ससंदर्भ प्रसंगपूर्ण अर्थांकन कीजिए न..,
" ये चौपाई लिखी किसने है..??"
राजू : -- मास्टर जी ! गोस्वामी तुलसी दास ने..,
" तो उन्ही से पूछो वो ही तुम्हें अच्छे से बताएंगे, तुम मुझे ये बताओ
कल तुम पुन: माल में क्या कर रहे थे.."
राजू : -- मास्टर जी ! 'जगत भौजाई' को ढूंड रहा था..,
" मिली..??'
राजू : -- मिली तो किन्तु उतनी आकर्षक नहीं लग रही थी
मास्टर जी ! ये कौन से क्षेत्र से आती हैं..??
" कुरुक्षेत्र से....."
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