मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 47 -----

राजू : -- मास्टर जी ! लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल किसे खाते हैं..??


" जब 'राजनेता' दिल्ली में बैठ कर हरियाणा के आंसुओं से गुजरात के मतों
  को तोले तो उसे लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल कहते हैं..!!


राजू : -- मास्टर जी ! कड़क धुप में, धूल धूसरित होकर, भूखी-प्यासी जनता को
           वातानुकूलित लम्बी गाड़ी से उतर कर महंगे महंगे वस्त्र धारी, ऊँचे-ऊँचे
           छाँवदार मंचों पर विराजमान नेता को 'मत' दान करने को कौन कहता है..??


         " चुनाव आयोग..,"


राजू : -- अर्थात, एक भ्रष्टाचारी भोग विलासित लोकतंत्र को मत दान कर सुदृढ करो,
            मास्टर जी ! ये चुनाव आयोग रहता कहाँ है..??


" और अधिक प्रश्न मत कर अन्यथा शासन की आबरू एवं आइब्रो दोनों उतर जायेगी....."


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