सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----

" हमारे देश के कर्णधार जहां चढ़ते-चढ़ते अपनी अपनी विधान सभा एवं संसदीय
  रेखा के ऊपर चढ़ गए , वहीँ मतदाता उतरते-उतरते निर्धन रेखा के निचे आ गए
  इससे पहले की मतदाता और निचे उतरें, ये कर्णधार स्वयं ही उतर जाएँ तो ही
  अच्छा है अन्यथा....." 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...