" हमारे देश के कर्णधार जहां चढ़ते-चढ़ते अपनी अपनी विधान सभा एवं संसदीय
रेखा के ऊपर चढ़ गए , वहीँ मतदाता उतरते-उतरते निर्धन रेखा के निचे आ गए
इससे पहले की मतदाता और निचे उतरें, ये कर्णधार स्वयं ही उतर जाएँ तो ही
अच्छा है अन्यथा....."
रेखा के ऊपर चढ़ गए , वहीँ मतदाता उतरते-उतरते निर्धन रेखा के निचे आ गए
इससे पहले की मतदाता और निचे उतरें, ये कर्णधार स्वयं ही उतर जाएँ तो ही
अच्छा है अन्यथा....."
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें