" क्यों राजू यदि पैर गरम, पेट नरम,सिर ठंडा तो..??
राजू : -- मास्टर जी ! तो डाक्टरों को मारो डंडा..... किन्तु
धीरे से पिछली बारी के P.M., C.M. को मारा था
बेचारे आज तक व्हीलचेयर पर हैं.....
अरे हाँ ! मास्टर जी ! उसके पश्चात आप कहाँ थे?
थे कहाँ आप " कुम्भकर्ण की लघु कथा" कहीं के
न तो बहु के ना ही बही के.....
" राजू ! में अब क्या बनूंगा..??"
राजू : -- मास्टर जी ! आप तो मास्टर ही रहिये 'मत' के दातार मत
बनिए अन्यथा मुर्ख ही बनेंगे, फिर इधर उधर आपरेशन
करते फिरेंगें, ये घोटाले बाज है वो घपला कर रहा है
हमारी न्यायालायें भी बैठी हैं इनकी रक्षा हेतु संजीवनी
देने के लिए.....
न तो बहु के ना ही बही के.....
" राजू ! में अब क्या बनूंगा..??"
राजू : -- मास्टर जी ! आप तो मास्टर ही रहिये 'मत' के दातार मत
बनिए अन्यथा मुर्ख ही बनेंगे, फिर इधर उधर आपरेशन
करते फिरेंगें, ये घोटाले बाज है वो घपला कर रहा है
हमारी न्यायालायें भी बैठी हैं इनकी रक्षा हेतु संजीवनी
देने के लिए.....
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