सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 49 -----

राजू : -- मास्टर जी ! माना कि :--
            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           " में सांख्यिकी का अध्यापक थोड़े ही हूँ साख्यिकी के अध्यापक से पूछो
             वही यह आकलन बताएँगे..,

राजू : -- मास्टर जी ! में यह प्रश्न सीधे "प्रधान" अध्यापक से ही पूछ लेता हूँ

           माना कि : -- आप "प्रधान" अध्यापक हैं..,

            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           मुझे यह ज्ञात था कि आपको सुनाई नहीं देता है..... बधीर हैं.....
           में श्रवण यन्त्र साथ लाया हूँ..... ये लीजिये लग गया.....कान में 

           मुझे यह भी ज्ञात था कि आप मूक नहीं हैं किन्तु "मौन" हैं 
           मैं ध्वनी विस्तारक यन्त्र भी साथ में लाया हूँ.....ये नीचे लग गया.....
           लो...गांधी जी का ऐनक तो लाया ही नहीं बिना ऐनक तो आपको दिखाई नहीं देता 
  
           "प्रधान" अध्यापक जी ! ये सारी वस्तुवें मुझे आपके अंगरक्षक ने उपलब्ध करवाई है 
            कहने लगे ले जाओ, आवश्यकता पड़ेगी

            अब कृपया उपरोक्त आंकलन के सह यह भी ज्ञात कीजिये कि  न्यायालय में 
            अपना पक्ष रखने व न्याय प्राप्त करने  में कितनी अवधि व कीतने पैसे लंगेंगे 

            " बहुत पैसे लगेंगे वो तेरे पास हैं नहीं"

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! ये पैसे लगाने के लिए लगते कहाँ है..??


           " पेड़ पर..."

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! फिर तो में अपना 'मत' पेड़ को ही दूंगा, 
             ऐसी सड़ी हुई व्यवस्था को क्यूँ दूँ जहां मुझे न्यायालय में केवल मात्र 
             प्रस्तुत होने में ही बहुंत पैसे व्यय करने हो.....   



 




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