बुधवार, 8 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 16 -----

'' राजू ! ये क्या कर रहे हो..?? '

राजू : -- मास्टर जी ! गाय को चीरा लगा रहा हूँ ..

 ' राजू ! तुम्हे चारा खिलाने को कहा था चीरा लगाने को नहीं कितनी बार
   तुम्हे कहा है की भेषज मत बना करो तुम भास ही उत्तम हो,
   राजू ! ये तुम्हारे भेस को क्या हुवा-----
                                            उदर अन्दर दत भंजक भुजा । मुख मंडल सुजन दिरिस दूजा ।।
                                            छीन भीन भय विगलित भेसा । भीन  भीन  केश ऋषि केसा ।।

   वत्स ! तुम्हारा तन वीभत्स काव्य कीर्तन कर रहा है,
   कहो बालक इस घट के औघट कौन घटना घटी..,

राजू : -- मास्टर जी ! दुर्घटना घटी चूँकि सावधानी हटी,
            कल एक भद्र महिला को मां-बहन कह दिया था
            एवं मेरी विषम वाणी का प्रसारण दूरदर्शन पर हो गया..

राजू ! यह अति उत्तम हुवा की तुम्हारी वाणी परकटी के सह स्पष्ट नहीं हुई
अन्यथा तुम्हारी वाणी का प्रसारण सीधे आकाश पर होता.....    
          

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