'' राजू ! ये क्या कर रहे हो..?? '
राजू : -- मास्टर जी ! गाय को चीरा लगा रहा हूँ ..
' राजू ! तुम्हे चारा खिलाने को कहा था चीरा लगाने को नहीं कितनी बार
तुम्हे कहा है की भेषज मत बना करो तुम भास ही उत्तम हो,
राजू ! ये तुम्हारे भेस को क्या हुवा-----
उदर अन्दर दत भंजक भुजा । मुख मंडल सुजन दिरिस दूजा ।।
छीन भीन भय विगलित भेसा । भीन भीन केश ऋषि केसा ।।
वत्स ! तुम्हारा तन वीभत्स काव्य कीर्तन कर रहा है,
कहो बालक इस घट के औघट कौन घटना घटी..,
राजू : -- मास्टर जी ! दुर्घटना घटी चूँकि सावधानी हटी,
कल एक भद्र महिला को मां-बहन कह दिया था
एवं मेरी विषम वाणी का प्रसारण दूरदर्शन पर हो गया..
राजू ! यह अति उत्तम हुवा की तुम्हारी वाणी परकटी के सह स्पष्ट नहीं हुई
अन्यथा तुम्हारी वाणी का प्रसारण सीधे आकाश पर होता.....
राजू : -- मास्टर जी ! गाय को चीरा लगा रहा हूँ ..
' राजू ! तुम्हे चारा खिलाने को कहा था चीरा लगाने को नहीं कितनी बार
तुम्हे कहा है की भेषज मत बना करो तुम भास ही उत्तम हो,
राजू ! ये तुम्हारे भेस को क्या हुवा-----
उदर अन्दर दत भंजक भुजा । मुख मंडल सुजन दिरिस दूजा ।।
छीन भीन भय विगलित भेसा । भीन भीन केश ऋषि केसा ।।
वत्स ! तुम्हारा तन वीभत्स काव्य कीर्तन कर रहा है,
कहो बालक इस घट के औघट कौन घटना घटी..,
राजू : -- मास्टर जी ! दुर्घटना घटी चूँकि सावधानी हटी,
कल एक भद्र महिला को मां-बहन कह दिया था
एवं मेरी विषम वाणी का प्रसारण दूरदर्शन पर हो गया..
राजू ! यह अति उत्तम हुवा की तुम्हारी वाणी परकटी के सह स्पष्ट नहीं हुई
अन्यथा तुम्हारी वाणी का प्रसारण सीधे आकाश पर होता.....
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