राजू : -- मास्टर जी ! अखिलभारत में झंडा फहर गया ये गव सम्पूर्ण विश्व में फहराएगी क्या..?
राजू ! तुझे क्यों कष्ट हो रहा है कितना सुन्दर तो गा रही है
बिलकुल कोयल के जैसे
राजू: -- मास्टर जी ! कोयला खाके कोयल जैसे ही गाएगी न
राजू ! तेरे मुखढ़े पर ये मुख किसने लगाया...लगाया तो लगाया
इस पर किसको बैढाया.. तेरी ये वाणी है या वीणा.....
राजू : -- मास्टर जी ! आप तो वेणुर्धर गोपाल हो..,
तू स्वयं को अंग्रेज समझता है किन्तु तू है नहीं ये बता तू क्या है.....
राजू : -- मास्टर जी ! में बहिर्गमन करता हूँ और भास बनता हूँ.....
राजू ! तुझे क्यों कष्ट हो रहा है कितना सुन्दर तो गा रही है
बिलकुल कोयल के जैसे
राजू: -- मास्टर जी ! कोयला खाके कोयल जैसे ही गाएगी न
राजू ! तेरे मुखढ़े पर ये मुख किसने लगाया...लगाया तो लगाया
इस पर किसको बैढाया.. तेरी ये वाणी है या वीणा.....
राजू : -- मास्टर जी ! आप तो वेणुर्धर गोपाल हो..,
तू स्वयं को अंग्रेज समझता है किन्तु तू है नहीं ये बता तू क्या है.....
राजू : -- मास्टर जी ! में बहिर्गमन करता हूँ और भास बनता हूँ.....
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