रविवार, 26 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 28 -----

राजू : -- मास्टर जी ! चाटुकार कैसे बनते हैं..??


           " राजनेता" बनकर..!!


राजू : -- मास्टर जी ! 'राजनेता' कैसे बनते हैं..??


           "दूरदर्शन पर दिखा रहें हैं ना वैसे..!!"


राजू : -- मास्टर जी ! विद्यमान "राजनेता' ऐसे ही बने थे..??


           "हाँ..,"


राजू : -- अर्थात पहले विधि, नियम, निति आदि का  उल्लंघन करो
            तत्पश्चात संसद में विराज कर नए नए नियम के निर्माता
            बनो, ये कैसा लोकतंत्र है मास्टर जी..??

     
           "वर्तमान  भारत में ऐसा ही लोकतंत्र है, तुम नया  वाला  लाना ठीक
            तथा कल 'भारत-स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात' के विषय पर व्यंगात्मक
            शैली में निबंध लिखकर लाना..!!"


राजू : -- जी मास्टर जी ! किन्तु निबंध का वर्णन मौखिक होगा अथव श्याम
            पट पर होगा..??

            " यह कल ही सूचित किया जाएगा..!!"     

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