शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 25 -----

" राजू ! तुम बढ़े होकर क्या बनोगे..? चित्रकार अथवा मूर्तिकार..??


राजू : -- मास्टर जी ! चाटुकार..!!!!!


" क्यों बनोगे..?"

राजू : -- मास्टर जी ! क्योंकि  चाटुकार  बनने  भर  से राष्ट्रपति एवं प्रधानमन्त्री
            बन सकते हैं, तत्पश्चात कुछ और बनने की आवश्यकता ही नहीं होगी....." 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...