बुधवार, 25 जुलाई 2012

----- || MINISTER RAAJU 9 || -----

राजू : -- मास्टर जी हमारे संविधान में राष्ट्रपति की व्यवस्था है
             हम राष्ट्रपिता  को सम्मानित  करते है किन्तु माता व
             पत्नी का सम्मान क्यूँ  नहीं करते..??


            " राजू हमारे संविधान में स्त्रीवाचक शब्दों का प्रयोग वर्जित है.."

राजू : -- मास्टर जी हमारे वेद पुराणों में तो भारत को माता के रूप में
             संबोधित करने की परम्परा है एवं कहा गया है: --
                     " यत्र नारीयस्त पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता"

   
            " राजू ! राजू !! राजू !!! ये आधुनिक  संविधान  है यहाँ 'संसद' में
              अपनी माता तुल्य स्त्रियों को 'परकटी' जैसे बहुत सारे अपशब्दों
              से सम्मानित व  करतल  ध्वनी से  अभिवादन  किया जाता है
              ऐसे 'लोगों' को  उच्च  पद  व  उच्च  आवास  में  निवास  करने             
              हेतु पुरस्कृत किया जाता है.."


राजू : -- "किन्तु मास्टर जी ऐसे कृत्य तो दंडनीय होने चाहिए..??"


            " राजू यदि ऐसा कृत्य  दंडनीय होता तो स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने
               वर्षों पश्चात भी पुरुष अपनी माता स्वरूप कन्याओं से बलात्कार
               जैसा जघन्य कृत्य क्यूँ करते....."


             "       

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