राजू : -- " मास्टर जी 'गधा-घोड़ा' वाले अध्याय में गधा व घोड़ा ज्ञात नहीं हुवा,
किंचित विस्तारपूर्वक स्पष्ट करते हुवे समझाइये न.."
" इस अध्याय का यह उपखंड कठीन है रहने दे तेरे सिर के
ऊपर से जाएगा.."
अर्थात : --
" अगर अपना कहा तुम आप ही समझे तो क्या समझे..,
मजा कहने का जब है एक कहे और दूसरा समझे..,
कलामे मीर समझें और ज़बाने मिर्जा समझें..,
मगर इनका कहा यह आप समझें या खुदा समझें....."
----- किसी ने कहा था -----
राजू : -- " समझ गया मास्टर जी.....!!"
किंचित विस्तारपूर्वक स्पष्ट करते हुवे समझाइये न.."
" इस अध्याय का यह उपखंड कठीन है रहने दे तेरे सिर के
ऊपर से जाएगा.."
अर्थात : --
" अगर अपना कहा तुम आप ही समझे तो क्या समझे..,
मजा कहने का जब है एक कहे और दूसरा समझे..,
कलामे मीर समझें और ज़बाने मिर्जा समझें..,
मगर इनका कहा यह आप समझें या खुदा समझें....."
----- किसी ने कहा था -----
राजू : -- " समझ गया मास्टर जी.....!!"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें