गुरुवार, 28 जून 2012

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" कड़ी कड़ी की कौढ़ीयां कौड़ी कौड़ी कोण..,
  काढ काढ कोढीवाल कोटि-कोटि कौण....." 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...